#11

मानो सुबह सुबह कोई बगीचे की ओर का पर्दा हटा दिया हो, ओर फूलों की ख़ुशबू के साथ सनसनातीं हुई हवा मेरी कानो में शोर मचा दिया हो , लग सी बेचेनि मेरी जिस्मोंजहां में मच गया हो, साँसे थमने लगी हो ,कपकपहट मानो रुक ही न रही हो ,

और

तेरे पास होने की अनुभूति मात्र से दूसरे ही पल बेहिसाब गर्मी मानो शरद में गर्मी का मौसम हो .,


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वक्त का बदलना तय हें. पलके झपक जाए तो ख़्वाब टूटना तय हें, तुम कहा फिर राहे हो बेवजह, हमदोनो का साथ होना तय हें॥॥ हमें ख़्वाब देखना तय हें॥॥ Time is sure to change. if you blink Dreams are bound to b

चीज़ों के गिरने के नियम होते हैं मनुष्यों के गिरने के कोई नियम नहीं होते। लेकिन चीज़ें कुछ भी तय नहीं कर सकतीं अपने गिरने के बारे में मनुष्य कर सकते हैं। 🌻

ख़्याल जेसे तुम्हारा ग़ुलाम हो गया हो ,आँखें मानो सदियों से सोया न हो , जेसे कोई उसे हर रात थपकी दे के गुम हो जाता हो , ग़ज़ब सी बेचेनी , हाथ रखते ही किसी को भी दिल की दस्तक पता चल जाती हो , और हर निव