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ख़्याल जेसे तुम्हारा ग़ुलाम हो गया हो ,आँखें मानो सदियों से सोया न हो , जेसे कोई उसे हर रात थपकी दे के गुम हो जाता हो , ग़ज़ब सी बेचेनी , हाथ रखते ही किसी को भी दिल की दस्तक पता चल जाती हो , और हर निवाले के साथ सड़कना मानो आदत सी हो गयी हो और क्या कह कर बताऊँ की तुम ,तुम नही , हम हो चुके हों।।

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मानो सुबह सुबह कोई बगीचे की ओर का पर्दा हटा दिया हो, ओर फूलों की ख़ुशबू के साथ सनसनातीं हुई हवा मेरी कानो में शोर मचा दिया हो , लग सी बेचेनि मेरी जिस्मोंजहां में मच गया हो, साँसे थमने लगी हो ,कपकपहट म

चीज़ों के गिरने के नियम होते हैं मनुष्यों के गिरने के कोई नियम नहीं होते। लेकिन चीज़ें कुछ भी तय नहीं कर सकतीं अपने गिरने के बारे में मनुष्य कर सकते हैं। 🌻