#1

ख़्वाबों की तप्तिस में वो ख़्वाब खो गई

न जाने क्यू एसी बात हो हुई

ख़्याल खो सा गया ख़्वाब गुमनाम हो गई

the poem trees.com

32 views0 comments

Recent Posts

See All

ख्वाब थे हक़ीक़त कब बन गए जुल्फो में खो कर, मेरे कब बन गए दवे पाऊ सिरहाने में आकर दवे पाऊं चोखट पर कब कर गए।